Tuesday, June 2, 2009

आओ!
हम उस ज़मीन को सींचे
जिसके अन्दर
नन्हा बीज छटपटा रहा है
अंकुरित होने को
.
आओ!
हम उस ज़मीन में खाद डाले
जिसके अन्दर
कोमल अंकुर लड़ रहा है
कठोर परतों से
पल्लवित होने को

हमें विश्वास है
हारना ही होगा उन परतों को;
ज़र्ज़र होना ही है
उन दीवारों को
जिसके भीतर
सृजन का एक भी बीज विद्यमान है

आओ!
हम भी अंकुरित हो
एक साथ
ताकि भेद सकें
उन अवरोधों; रूढ़ियों को
जो हमारे अस्तित्व के
प्रस्फुटन में बाधक है

19 comments:

मीनाक्षी said...

सृजन का एक बीज भी अगर अंकुरित हुआ तो आशा की किरण इस सृष्टि मे जगमगा उठेगी... ब्लॉगजगत मे आपका स्वागत है...

श्याम सखा 'श्याम' said...

सुन्दर अभिव्यक्ति,ब्लॉगिंग के पहले कदम पर सकारात्मक सोच पर एक और बधाई-यहां अक्सर लोग अपनी भड़ास ही निकालने आते हैं
http//:gazalkbahane.blogspot.com/या
http//:katha-kavita.blogspot.com पर कविता ,कथा, लघु-कथा,वैचारिक लेख पढें

श्यामल सुमन said...

भाव बहुत अच्छे लगे सृजन का है सत्कार।
सामाजिक जड़ता हँटे तब सुन्दर संसार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.

Pradeep Kumar said...

हमें विश्वास है
हारना ही होगा उन परतों को;
ज़र्ज़र होना ही है
उन दीवारों को
जिसके भीतर
सृजन का एक भी बीज विद्यमान है

sahee kahaa hai srijan ka beej hai to paudhaa bhi ugega .
blog jagat main aapka swagat hai

ravikumarswarnkar said...

अच्छी कविता...

शुभकामनाएं...

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

आप की कविता पर कमेन्ट करने औकात ही नहीं है मैं तो इतना ही कहूँगा बेहतरीन
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

परमजीत बाली said...

सुन्दर रचना है।बधाई।

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा लिखा है आपने । आपका शब्द संसार भाव, विचार और अभिव्यिक्ति के स्तर पर काफी प्रभावित करता है ।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-फेल होने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

राजेंद्र माहेश्वरी said...

परम्पराओ की तुलना में विवेक को महŸव दीजिये।
ब्लॉगजगत मे आपका स्वागत है

woyaadein said...

सर्वप्रथम तो चिट्ठाजगत में आपका स्वागत करता हूँ......प्रशंसनीय है आपकी कविता सृजनात्मकता पर.......आशा है भविष्य के गर्भ में बहुत सारे सृजन के बीज छुपे हों और वे फल-फूलकर हिंदी चिट्ठाजगत को समृद्ध करने में अपना अमूल्य योगदान दें......

साभार
हमसफ़र यादों का.......

Kavyadhara said...

बुद्धम शरणं गच्छामि................

दो पल सुख से सोना चाहे पर नींद नही पल को आए
जी मचले हैं बेचैनी से ,रूह ना जाने क्यों अकुलाए
ज्वाला सी जलती हैं तन मे ,उम्मीद हो रही हंगामी .....
बुद्धम शरणं गच्छामि................

मन कहता हैं सब छोड़ दूँ मैं पर जाने कैसे छुटेगा ये
लालच रोज़ बढ़ता जाता हैं लगती दरिया सी तपती रेत
जब पूरी होती एक अभिलाषा खुद पैदा हो जाती आगामी......
बुद्धम शरणं गच्छामि................

नयनो मे शूल से चुभते हैं, सपने जो अब तक कुवारें हैं
कण से छोटा हैं ये जीवन और थामे सागर कर हमारे हैं
पागल सी घूमती रहती हैं इस चाहत मे जिन्दगी बे-नामी........
बुद्धम शरणं गच्छामि................

ईश्वर हर लो मन से सारी मोह- माया जैसी बीमारी
लालच को दे दो एक कफ़न ,ईर्ष्या को बेवा की साड़ी
मैं चाहूँ बस मानव बनना ,मांगू एक कंठी हरि नामी ....
बुद्धम शरणं गच्छामि................

(सर्वाधिकार सुरक्षित @ कवि दीपक शर्मा )

http://kavyadhara-team.blogspot.com
http://shayardeepaksharma.blogspot.com
http://www.kavideepaksharma.co.in
http://www.kavideepaksharma.com

दिगम्बर नासवा said...

सृजन ही तो जीवन है.............. बीज ने तो अंकुरित होना ही है............ उमीदों से भरी लाजवाब रचना है.बधाई हो इस सुन्दर रचना के लिए

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छी लगी आपकी यह रचना

अनिल कान्त : said...

bahut achchhi rachna
bahut achchhi lagi mujhe

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

SWAPN said...

bahut pyar rachna , badhai sweekaren.

mere blog par aane aur comment dene ke liye hardik dhanyawaad, punah padharen.

नारदमुनि said...

sahaj,saral or payari rachna hai. narayan narayan

निर्झर'नीर said...

ittifaq kaho ya accha lekhan ..aapka blog baar baar khiich lata hai .

khoobsurat ,gahra bhaav
chintan se bhara

AlbelaKhatri.com said...

sabse achhi baat toh ye hai ki kahin koi aadambar nahin hai...na shabdon ka , na shilp ka aur na hi vaicharik star par apni prakaandta ko chaspa karne ka ..............rahi baat kavita ki toh kavita umda hai ...bahut hi umda hai ..
satyam!
shivam!
sundaram!
HARDIK SHUBH KAAMNAAYEN...

आनंदकृष्ण said...

आज आपका ब्लॉग देखा.... बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है कि आपके शब्दों को नये अर्थ, नयी ऊंचाइयां एयर नयी ऊर्जा मिले जिससे वे जन-सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति का सार्थक माध्यम बन सकें.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें-
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर

हमारीवाणी

www.hamarivani.com

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